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Living Feminisms
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मेरी कहानी- तुम्हारी कहानी

by जुही जैन
इस लेख में प्रस्तुत तीनों आप बीतियों से 'सुरक्षित' परिवारों के अंदर होने वाली ज़्यादतियों का पता चलता है। साथ ही कुछ मिथक भी टूटते हैं जैसे- परिवार में यौन हिंसा सिर्फ निम्न बर्ग में नहीं हैं; यह न तो कोई मानसिक बीमारी है न ही विकृत मानसिकता का नतीज़ा; यह अनपढ़-गरीब के आलावा, मध्यम और उच्च वर्ग में आम बात है।
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न्याय की लड़ाई में फ़तह

by वीणा शिवपुरी
राजस्थान में भटेरी गांव में 1992 में महिला विकास कार्यक्रम की साथिन भंवरी देवी के साथ सामूहिक बलात्कार हुआ। इस घटना ने देशव्यापी बहस छेड़ी और कामकाजी महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े कई सवाल उठाए। इसके परिणामस्वरुप उच्चन्यायालय ने सभी काम के स्थानों, संस्थाओं में यौन-उत्पीड़न के सभी रूपों की रोकथाम के निर्देश दीए। हालांकि भंवरी को अभी तक न्याय नहीं मिला है लेकिन व्यापक अर्थ में यह उसकी न्याय की लड़ाई में एक फ़तह है।
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'नुशू': औरतों की अपनी भाषा

by जुही जैन
चीन के दक्षिण-पश्चिम भाग में हुनान प्रान्त की औरतें सदियों तक 'नुशू' लिपि का इस्तेमाल करती थीं। यह केवल औरतों की लिपि थी और इसे जानने, पढ़ने व लिखने वाली सिर्फ औरतें थीं। अतः शांग्ज़्यांगजू की औरतों के पास अपनी ज़िन्दगी की सच्चाई बयान करने का अधिकार और आज़ादी दोनों थीं। आगे पढ़िए...
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पिंजरे का पंछी

कहानी
by मृदुला
पढ़िए एक ऐसी औरत की कहानी जो साबित करता है कि यदि पुरुष पर कोई मुश्किल आ पड़े तो औरत अपनी मेहनत और लगन से उसका मुकाबला कर सकती है और घर की ज़िम्मेदारी आसानी से संभाल सकती है।
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महिला समाख्या: शक्तियात्रा

by वीणा शिवपुरी
महिला समाख्या कार्यक्रम के मुख्य उद्देश्यों में से एक खास उद्देश्य है शिक्षा और संगठन के द्वारा गरीब-देहाती औरतों को सामूहिक सक्रियता के लिए तैयार करना। पढ़िए किस प्रकार महिला समाख्या परियोजना के तहत ग्रामीण औरतों के लिए सशक्तता का रास्ता तैयार किया गया।
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अपनी-अपनी खुशबू

by विजयदान देथा
पढ़िए मालन और मछुवान की यह रोचक कहानी।

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Concept: Jagori | Content: Amrita Nandy | Design: Avinash Kuduvalli
Development and Maintenance: Zenith Webtech

About Living Feminisms

Living Feminisms is an attempt to share archives preserved by Jagori, a New Delhi-based feminist organisation from the eighties. It offers subjective accounts by our curators as well as access to publications, songs, pamphlets, posters, photographs, poems etc. Together, they reflect the diverse spectrum that is the autonomous Indian women’s movement, its struggles, solidarities and differences, laughter, anger, carefree moments, campaigns, love, loss, work and home.

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