दाइयां: बुद्धिमती, कुशल और अमूल्य

by वैद्य स्मिता बाजपई / Ref वैद्य स्मिता बाजपई
भारत में छह लाख से ज़्यादा दाइयां हैं जो ग्रामीण व आदिवासी क्षेत्रों में प्रसवों में मदद करती हैं। परन्तु कौशल रखने के बावजूद न ही उन्हें उचित सम्मान मिलता है न ही दर्जा। पितृसत्तात्मक व्यवस्था में उनके काम को "गन्दा" व "अशुद्ध" समझा जाता है। इस लेख में दाई की योग्यताएं, उनके काम के प्रति उनका अपना व परिवारों का नज़रिया, दाई आंदोलन इत्यादि जैसे पहलुओं पर चर्चा की गई है।
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Jagori
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