मेरी संस्कृति, मेरी विरासत- आजी और मां

आमने- सामने
by सुजाता पारमिता / Ref सुजाता पारमिता
इस लेख में दलित नारीवादी विचारक सुजाता पारमिता अपनी आजी (नानी) और मां के जीवन के बारे में लिखती हैं। इन दोनों को अपने जीवन में प्रेरणा का सबसे महत्वपूर्ण श्रोत बताते हुए वे लिखती हैं कि भले ही उनकी आजी और मां जीवन भर अपनी परिस्थितियों से संघर्ष करती रहीं, कभी जीतीं, कभी हारी भी पर उनकी प्रतिबद्धता में कभी कमी नहीं आई। जीवन भर वे गुलाम भारत में दलित महिलाओं की स्थिति व सरोकारों से जुड़ी रहीं।
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Jagori
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