निरक्षर से प्रेरक तक का सफर

by मनोहर लाल अायॅ / Ref मनोहर लाल अायॅ
" कृष्णा को पढ़ने का शौक इतना था कि खाली समय में भी वह पुस्तकें पढ़ती, पत्र लिखती । उसकी लगन और मेहनत का यह फल हुआ कि एक ही साल में उसने बहुत कुछ फल हुआ था । सन् १९८४ में उन्हें केंद्र के अनुदेशक का काम सौंप दिया गया इस नई ज़िम्मेदारी को कृष्णा ने बखूबी निभाया अपने मधुर व्वयहार और लगन से वह गाव की स्त्रियों में लोकप्रिय हो गई । ... कृष्णा की कोशिशो से आज ढ़ाणी की सौ फी सदी महिलाए साक्षर हैं । " आगे पढ़िए ...
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